सच हमेशा कड़वा होता है।

यह एक ऐसा सच है जो हमारी भारतीय सोसायटी को हजम कर पाना बहुत मुश्किल है, पहले कहिये गणेशजी भगवान की जय, गणेश उत्सव और गणेश विसर्जन यह हमारे भारतीय संस्कृति का बड़ा हिस्सा है, आप कहेंगे कि गणेशजी से ही से इस विषय की चर्चा क्यों तो अभी अभी ही गणेशजी का उत्सव खत्म हुआ है तो मैं भगत जनों को बता दू कि मेरा मक़सद किसी भगवान के खिलाफ गलत बात करना नहीं है आप इस वाक्य को ध्यान से पढ़े और हर शब्द को अपने दिमाग में उतारे।

आज हम गणेश उत्सव बहुत ही धूम-धाम से मनाते है साल में यह त्यौहार एक बार आता है और हम सब इसका बेसब्री से इंतजार करते है और जैसे ही गणेश उत्सव आता है हम उनकी सेवा में दिन-रात लगा देते है और यह उत्सव घर के अलावा सार्वजनिक रूप से भी मानाया जाता है सार्वजनिक मतलब एक कॉलोनी स्टेज बनकर बैठ्या जाता गणपतिजी को और हर एक नगर में उस स्टेज को कोई मंडल का नाम दिया जाता है और फिर उस कॉलोनी के कुछ लोग मंडल में कार्यकर्ता का काम करते है और अपने कॉलोनी में हर घर जाकर चन्दा(पैसे कलेक्शन) जमा करते है और फिर सार्वजनिक रूप से गणेशजी बैठाए जाते है और १०-११ दिन जमकर उत्साह के साथ मनाया जाता है और फिर वो समय आता जब गणेशजी को विदा किया जाता बहुत धूम-धड़ाके के साथ ढोल नगाड़े बजाए जाते है खूब नाच-गाना किया जाता है।

लेकिन इस बीच में हम यह भूल जाते है की किसी को घर जाने की घाई होती है या किसी को ईमरजेंसी होती है, रास्ते से जब गणेशजी को ले जाया जाता है तो कुछ बुरे लोग रास्ते में शराब पीकर लोगो को परेशान करते है और तो और रास्ता जाम कर देते है, बहुत सारे कॉलोनी में तो १०-२० गणेशजी बैठाए जाते है मेरा आप से यही विनती है अगर आपको भगवान से इतना ही प्यार तो वही पैसा आप गरीब लोगो की मदद में लगाओ भगवान भी तो यही कहते है की हमेशा दुसरो की मदद करे, एक कॉलोनी में एक ही गणेशजी काफी है १०-२० गणेशजी रखने का क्या मतलब आता है वही पैसा आप कही दान कर दीजिए और आजकल लोग जब गणेशजी को विसर्जन करने जाते है तो साथ में फूल-माला और सब समान लेकर जाते है और तलाब या नदी में डाल देते है और इसे पूरा का पूरा पानी गंदा हो जाता है और आज कल तो नया फैशन चालू हो गया है जुम्मा चुम्मा देदे, खलिबली हो गया है दिल, झिंगाट और bom diggy diggy bom जैसे गानो के साथ गणपति जी को विदा किया जाता है

कुछ कुछ जगह में तो जाने के लिए जगह ही नहीं होती है छोटी-छोटी गली होती है फिर भी यह परेशानी मंडल के लोगो को समझ में नहीं आती है और कुछ मंडल के लोग अपने मौज-मस्ती के लिए यह सब करते है।

आप कहेंगे यह कैसा सच है अगर आप सही मे इस बात का एहसास करेंगे तभी आपको पता चलेगा यह एक ऐसा सच है जो बहुत ज्यादा कड़वा है इसलिए तो मैंने आप सब से कहा कि, आप इस वाक्य को ध्यान से पढ़े और हर शब्द को अपने दिमाग में उतारे।

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कर्म ही पूजा है।

आज ही के दिन दिनांक १९/०९/२०१७ समय १ बजकर २१ मिनट में शिरिल का जन्म हुआ, शिरिल के एक साल हमे लगा युही निकल जायेंगे पर उसका हर एक दिन कुछ नया होता था या यु कहे वो हर दिन वो कुछ अलग ही सीखता था

शिरिल आज १९/०९/२०१८ को पूरे एक वर्ष का हो गया है आज सुबह हम उसे तैयार करके गार्डन लेकर गए और वहां हमने उसका जन्मदिन मनाया और फोटोशूट किया और फिर हम सब घर वापस आ गए।

थोड़ी देर बाद हमारे घर में काम करने वाली बाई आयी और शिरिल की मम्मी ने बाई को बताया की हम गार्डन गए थे, आज सुबह हमने वहाँ पर शिरिल का जन्मदिन मनाया फिर बाई ने कहा शिरिल की मम्मी को की आप को पहले मंदिर लेकर जाना चाहिए था भगवान के दर्शन के लिए फिर शिरिल की मम्मी ने मुझे यह बात बताई तो मैंने कहा ठीक है हम बाद में चले जायेंगे फिर हम शिरिल का जन्मदिन मनाने शाम को आश्रम गए।

और वहां पर हमने शिरिल का जन्मदिन मनाया हम सब को बहुत अच्छा लगा की हमने आश्रम के बच्चों और ओल्ड ऐज के बीच शिरिल का जन्मदिन मनाया फिर हम आश्रम से वापस घर जा रहे थे तभी हमे रास्ते में हनुमानजी का मंदिर मिला फिर हमने वही शिरिल को दर्शन कराए और हम वापस घर आ गए।

फिर घर आने के बाद मैंने शिरिल की मम्मी को कहा कि जन्मदिन के दिन भगवान के दर्शन करना जरुरी था, लेकिन शिरिल को उसे पहले कुछ अच्छा काम करना जरुरी था क्योंकि कर्म ही पूजा है अगर हमने दूसरों की सेवा नहीं की तो मंदिर में जाने का कोई अर्थ नही है।

फिर हम दुसरे दिन अपने-अपने काम में लग गए, फिर शाम को अचानक शिरिल की मम्मी ने मुझे कहा की हमने शिरिल का जन्मदिन आश्रम में बनकर ठीक नहीं किया मैंने कहा क्या हो गया हमने क्या गलत किया, शिरिल की मम्मी ने कहा हमने जन्मदिन मनाया वो गलत नहीं था पर हमने शिरिल के हाथों से केक कटवाया वो गलत था।

मैं समझा गया शिरिल की मम्मी क्या कहना चाहती है मैंने भी कहा मुझे भी ठीक नहीं लगा जब शिरिल केक काट रहा था तब आश्रम के बच्चे क्या सोच रहे होंगे कि काश हमारे भी मम्मी-पापा होते तो वो भी ऐसे जन्मदिन मनाते थे हमारा।

यह सही में एक सोचने वाली बात है, कि हम सोच तो लेते है कि आश्रम के बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए पर हम यह भूल जाते है उन्हें बाद में बहुत बुरा लगेगा।

खैर मेरी आप सभी से यही विनती है, कि अगली बार जब आप अपना या अपने किसी का जन्मदिन मनाने आश्रम में जाए तो केक आश्रम के सारे बच्चो को काटने दे आखिर कार हम आश्रम में जो काम करने जा रहे है वो आश्रम के बच्चों की खुशी के लिए है तो अगली बार हम उनकी ख़ुशी मनाये न की हम अपने बारे में सोचे।